शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
बस इतना समझ लो, तेरी चाहत की ये दास्तान मेरी ज़िंदगी के सफर में,
हर पल नया रंग भर रहा है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 930]
हर पल नया रंग भर रहा है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 930]