शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
हां, तेरी हर अदा का जलवा मेरी रूह की गहराइयों में,
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 542]
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 542]