शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
यूं तो, तेरी नज़रों का ये तीर मेरी हर सांस में,
अमृत बनकर घुल गया है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 604]
अमृत बनकर घुल गया है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 604]