शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
खामोशियों के दरमियां, तेरी सांसों की महक मेरी ज़िंदगी के सफर में,
रूह को मदहोश कर रहा है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 541]
रूह को मदहोश कर रहा है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 541]