शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
ज़माने से कह दो, तेरी मासूम आँखों का नूर मेरे रोम-रोम के अहसास में,
जादू की तरह असर कर रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 181]
जादू की तरह असर कर रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 181]