बेवफा शायरी इन हिंदी
खामोशियों के दरमियां, जुदाई का ये कड़वा ज़हर मेरी भीगी आँखों में,
अंधेरों में धकेल रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया।
अंधेरों में धकेल रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया।