शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
मेरी हर दुआ में, तेरी चाहत की ये दास्तान मेरी रूह की गहराइयों में,
अमृत बनकर घुल गया है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 265]
अमृत बनकर घुल गया है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 265]