शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
हां, तेरे कदमों की आहट मेरे सपनों के आंगन में,
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 670]
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 670]