शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
हां, तेरी वफाओं का ये समंदर मेरे ख्यालों की दुनिया में,
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तेरे दम से ही मेरी ज़िंदगी का हर एक लम्हा गुलज़ार है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 395]
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तेरे दम से ही मेरी ज़िंदगी का हर एक लम्हा गुलज़ार है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 395]