शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
ज़िंदगी के सफर में, तेरी पनाहों का ये सुकून मेरे सपनों के आंगन में,
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 238]
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 238]