४ लाइन शायरी (रुबाई)
मेरी हर दुआ में, तेरी धड़कनों की आवाज़ मेरी हर सुबह ओ शाम में,
रूह को मदहोश कर रहा है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।
रूह को मदहोश कर रहा है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।