४ लाइन शायरी (रुबाई)
सुनो, तेरे हुस्न का ये दीदार मेरी खुशियों के आशियाने में,
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 874]
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 874]