४ लाइन शायरी (रुबाई)
ऐ सनम, तेरी ज़ुल्फ़ों की हसीन छांव मेरी आँखों की पुतलियों में,
दिल को दीवाना बना रहा है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 454]
दिल को दीवाना बना रहा है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 454]