इश्क़ और मोहब्बत शायरी
ज़माने से कह दो, तेरे हुस्न का ये दीदार मेरी खुशियों के आशियाने में,
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।