इश्क़ और मोहब्बत शायरी
इश्क़ में, तेरी चाहत की ये दास्तान मेरी हर सुबह ओ शाम में,
रूह को मदहोश कर रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही।
रूह को मदहोश कर रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही।