इश्क़ और मोहब्बत शायरी
खामोशियों के दरमियां, तेरी सांसों की महक मेरे रोम-रोम के अहसास में,
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।