इश्क़ और मोहब्बत शायरी
कसम से, तेरी इबादत का सुरूर मेरे सपनों के आंगन में,
नया उजाला बिखेर रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।
नया उजाला बिखेर रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।