शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
ऐ दोस्त, तेरी सांसों की महक मेरी हर सुबह ओ शाम में,
गुलाब की तरह महक रहा है, कि हर जन्म में मुझे सिर्फ और सिर्फ तेरा ही साथ चाहिए।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।
गुलाब की तरह महक रहा है, कि हर जन्म में मुझे सिर्फ और सिर्फ तेरा ही साथ चाहिए।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।