शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
हां, तेरी पनाहों का ये सुकून मेरी तकदीर के पन्नों पर,
चाँद की तरह चमक रहा है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 167]
चाँद की तरह चमक रहा है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 167]