शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
इश्क़ में, तेरे लबों की ये हंसी मेरी हर मुराद में,
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 59]
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 59]