शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
ऐ दोस्त, तेरी पाकीज़ा वफ़ा का साया मेरे ख्यालों की दुनिया में,
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 475]
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 475]