शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
बेशक, तेरे कदमों की आहट मेरे सपनों के आंगन में,
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 702]
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 702]