शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
दिल कहता है, तेरी पाकीज़ा वफ़ा का साया मेरे ख्यालों की दुनिया में,
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 859]
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 859]