शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
ऐ सनम, तेरी ज़ुल्फ़ों की हसीन छांव मेरे दिल के हर कोने में,
हर ग़म को मिटा रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 248]
हर ग़म को मिटा रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 248]