ग़ज़ल और नज़्म
दिल कहता है, तेरी दीवानगी का ये आलम मेरी रूह की गहराइयों में,
बेपनाह सुकून दे रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है।
बेपनाह सुकून दे रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है।