ग़ज़ल और नज़्म
यूं तो, तेरी धड़कनों की आवाज़ मेरे रोम-रोम के अहसास में,
गुलाब की तरह महक रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।
गुलाब की तरह महक रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।