ग़ज़ल और नज़्म
अक्सर, तेरी यादों का ये चमन मेरे ख्यालों की दुनिया में,
अमृत बनकर घुल गया है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है।
अमृत बनकर घुल गया है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है।