ग़ज़ल और नज़्म
हां, तेरे इश्क का पावन रंग मेरी आँखों की पुतलियों में,
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है।
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है।