ग़ज़ल और नज़्म
तेरी खूबसूरत सूरत का नूर मेरी सूनी रातों में,
नया उजाला बिखेर रहा है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं।
नया उजाला बिखेर रहा है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं।