ग़ज़ल और नज़्म
खुदा गवाह है, तेरे साथ बिताया हर पल मेरी खामोश इबादतों में,
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि दिलों के ये रूहानी रिश्ते कभी दूरियों से नहीं टूटते।
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि दिलों के ये रूहानी रिश्ते कभी दूरियों से नहीं टूटते।