ग़ज़ल और नज़्म
दिल की गहराइयों से, तेरे हुस्न का ये दीदार मेरे दिल के हर कोने में,
ज़िंदगी को रोशन कर रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।
ज़िंदगी को रोशन कर रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।