४ लाइन शायरी (रुबाई)
बस इतना समझ लो, तेरी वफाओं का ये समंदर मेरी खामोश इबादतों में,
हर पल नया रंग भर रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 889]
हर पल नया रंग भर रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 889]