४ लाइन शायरी (रुबाई)
कसम से, तेरी मुस्कुराहट की चमक मेरी हर सांस में,
गुलाब की तरह महक रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 109]
गुलाब की तरह महक रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 109]