बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
बेशक, उदासी की ये लंबी शामें मेरे दर्दमंद दिल में,
अंधेरों में धकेल रहा है, कि किसी को अपना बनाकर खोना बहुत ज्यादा दर्द देता है। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 917]
अंधेरों में धकेल रहा है, कि किसी को अपना बनाकर खोना बहुत ज्यादा दर्द देता है। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 917]