इश्क़ और मोहब्बत शायरी
सच है, तेरी पाकीज़ा वफ़ा का साया मेरी खामोश इबादतों में,
हर पल नया रंग भर रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।
हर पल नया रंग भर रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।