शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
हां, तेरा ख्याल मेरी रूह में मेरी हर सुबह ओ शाम में,
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 145]
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 145]