शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
यूं तो, तेरी ज़ुल्फ़ों की हसीन छांव मेरी सूनी रातों में,
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 529]
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 529]