शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
हर घड़ी, तेरी चाहत की ये दास्तान मेरी रूह की गहराइयों में,
अमृत बनकर घुल गया है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 905]
अमृत बनकर घुल गया है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 905]