शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
दिल कहता है, तेरे हुस्न का ये दीदार मेरी आँखों की पुतलियों में,
हमेशा के लिए बस गया है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 181]
हमेशा के लिए बस गया है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 181]