शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
मेरे हमदम, तेरी सांसों की महक मेरी ज़िंदगी के सफर में,
रूह को मदहोश कर रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 349]
रूह को मदहोश कर रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 349]