शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
ऐ सनम, तेरी पाकीज़ा वफ़ा का साया मेरे दिल की धड़कनों में,
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 20]
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 20]