शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
हर घड़ी, तेरी चाहत की ये दास्तान मेरी ज़िंदगी के सफर में,
हर पल नया रंग भर रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 2]
हर पल नया रंग भर रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 2]