ग़ज़ल और नज़्म
यकीन मानो, तेरी मोहब्बत की खुशबू मेरी आँखों की पुतलियों में,
मेरी पहचान बन चुका है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।
मेरी पहचान बन चुका है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।