बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
सुनो, अधूरे ख्वाबों का ये बिखरा मंज़र मेरे खामोश आशियाने में,
कांच की तरह बिखर रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने।
कांच की तरह बिखर रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने।