बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
ज़माने से कह दो, मोहब्बत में मिले धोखे का नासूर मेरी वीरान ज़िंदगी में,
नासूर बनकर रिस रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने।
नासूर बनकर रिस रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने।