बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
याद रखना, दिल के अरमानों का ये जनाज़ा मेरी खामोश रातों में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी।
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी।