४ लाइन शायरी (रुबाई)
यूं तो, तेरे इश्क की ये बारिश मेरी खुशियों के आशियाने में,
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 538]
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 538]