४ लाइन शायरी (रुबाई)
हां, तेरे इश्क का पावन रंग मेरी सूनी रातों में,
हर ग़म को मिटा रहा है, कि इश्क़ का ये खूबसूरत और पावन सफर कभी खत्म न हो। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 626]
हर ग़म को मिटा रहा है, कि इश्क़ का ये खूबसूरत और पावन सफर कभी खत्म न हो। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 626]