शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
अक्सर, तेरी पनाहों का ये सुकून मेरे सपनों के आंगन में,
मेरी पहचान बन चुका है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 654]
मेरी पहचान बन चुका है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 654]