ग़ज़ल और नज़्म
सच है, तेरे कदमों की आहट मेरी हर एक दुआ में,
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें।
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें।